Carl Gustaf Mk IV: दुश्मनों के टैंकों का काल! भारतीय सेना में शामिल होंगे 450 स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, जानें इसकी ताकत

🚨 DEFENCE BREAKING: भारतीय सेना (Indian Army) की इन्फैंट्री यूनिट्स की ताकत में भारी इजाफा होने जा रहा है। दुश्मनों के बख्तरबंद टैंकों को तबाह करने के लिए सेना जल्द ही 450 नए और अत्याधुनिक Carl Gustaf Mk IV रॉकेट लॉन्चर अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है।

भारतीय सेना अपने आधुनिकीकरण अभियान (modernisation drive) के तहत लगातार अपनी मारक क्षमता को बढ़ा रही है। इसी कड़ी में सेना ने ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत 450 स्वदेशी रूप से निर्मित Carl Gustaf Mk IV मल्टी-रोल रॉकेट लॉन्चर खरीदने का प्रस्ताव (RFP) जारी किया है। यह घातक हथियार विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा。

यह नया Carl Gustaf Mk IV पुराने कंधे से दागे जाने वाले (shoulder-fired) हथियारों की जगह लेगा, जिससे सैनिकों को अधिक बहुमुखी (versatile) और हल्का सिस्टम मिलेगा।

INDIAN ARMY MODERNISATION
450 NEW ROCKET LAUNCHERS
Make In India: स्वीडन के बाहर पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट

भारत में ही बनेगा Carl Gustaf Mk IV

स्वीडिश फर्म साब (Saab) द्वारा डिज़ाइन किया गया यह Carl Gustaf Mk IV अब पूरी तरह से “मेक इन इंडिया” के तहत भारत में ही निर्मित होगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन लॉन्चर्स का निर्माण हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित साब (Saab) की आगामी फैसिलिटी में किए जाने की उम्मीद है。

भारत की उदारीकृत रक्षा निवेश नीति के तहत, यह प्लांट देश की पहली पूरी तरह से विदेशी स्वामित्व (fully foreign-owned) वाली रक्षा विनिर्माण इकाई है। स्वीडन के बाहर Carl Gustaf Mk IV सिस्टम के लिए यह पहला प्रोडक्शन साइट बनने जा रहा है, जो स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस सपोर्ट की लंबी अवधि तक उपलब्धता सुनिश्चित करेगा。

Carl Gustaf Mk IV की खासियतें और वजन

इस नए Carl Gustaf Mk IV की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद हल्का वजन है। पुराने संस्करणों की तुलना में यह काफी हल्का है; जहाँ M2 संस्करण का वजन 14 किलोग्राम और M3 संस्करण का वजन 10 किलोग्राम था, वहीं इस नए लॉन्चर का वजन (साइट्स और एक्सेसरीज़ को छोड़कर) लगभग 6.6 से 7 किलोग्राम है。

यह नया लॉन्चर 1,000 मीटर दूर तक के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से भेद सकता है। RFP के अनुसार, इसे 50°C (राजस्थान के रेगिस्तान) से लेकर -20°C (हिमालयी सीमा) के अत्यधिक तापमान में शानदार प्रदर्शन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अलावा, Carl Gustaf Mk IV में कम से कम 1,500 राउंड या 15 वर्ष की न्यूनतम बैरल लाइफ (barrel life) अनिवार्य की गई है。

आधुनिक तकनीक: यह लॉन्चर आधुनिक साइटिंग सिस्टम, जैसे डिजिटल फायर-कंट्रोल डिवाइस, रेड-डॉट साइट्स, डिजिटल शॉट काउंटर और पिकाटिनी रेल्स (Picatinny rails) के साथ पूरी तरह से अनुकूल है, जो सैनिकों की थकान को कम करता है।

गोला-बारूद (Ammunition) की विविधता

Carl Gustaf Mk IV भारतीय सेना में पहले से सेवा में मौजूद विभिन्न प्रकार के 84mm गोला-बारूद फायर कर सकता है। इसे घरेलू स्तर पर Munitions India Limited द्वारा निर्मित किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से दो कैटेगरी शामिल हैं:

  • Anti-tank round: यह विशेष रूप से बख्तरबंद लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • HEDP round: हाई एक्सप्लोसिव डुअल पर्पस राउंड हल्के बख्तरबंद वाहनों और किलेबंदी (fortifications) को भेदने में सक्षम है।
  • Smoke round: इसका उपयोग दुश्मन की नजरों से बचने और धुएं की स्क्रीन (smoke screens) बनाने के लिए किया जाता है।
  • Illumination round: रात के ऑपरेशन्स के दौरान युद्ध के मैदान में रोशनी (battlefield lighting) प्रदान करता है।
Carl Gustaf Mk IV Specifications
हथियार का प्रकार 84mm मल्टी-रोल रिकॉइललेस रॉकेट लॉन्चर
निर्माता (Manufacturer) Saab (हरियाणा के झज्जर प्लांट में निर्मित)
वजन (Weight) लगभग 6.6 – 7 किलोग्राम
प्रभावी रेंज (Range) 1,000 मीटर तक
ऑपरेटिंग तापमान -20°C से +50°C तक

निष्कर्ष (Conclusion)

भारतीय सेना का कार्ल गुस्ताफ सिस्टम के साथ जुड़ाव 1970 के दशक के मध्य से है, जब 1974 में पहली आपूर्ति आई थी। तब से M2 और M3 वर्जन सेना की इन्फैंट्री का अहम हिस्सा रहे हैं। अब इस नए Carl Gustaf Mk IV के शामिल होने से भारत की रक्षा विनिर्माण (defence manufacturing) क्षमताओं को पंख लगेंगे और सेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

रक्षा जगत की ऐसी ही और अधिक जानकारियों और लाइव अपडेट्स के लिए आप रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

FAQs: Carl Gustaf Mk IV Launcher

Carl Gustaf Mk IV का निर्माण भारत में कहाँ किया जाएगा?
इसका निर्माण हरियाणा के झज्जर जिले में स्वीडिश कंपनी साब (Saab) की नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में किया जाएगा।
नए Carl Gustaf Mk IV का वजन कितना है?
साइट्स और एक्सेसरीज को छोड़कर इस नए वेरिएंट का वजन लगभग 6.6 से 7 किलोग्राम है, जो पुराने M2 (14 किग्रा) और M3 (10 किग्रा) से काफी हल्का है।
यह लॉन्चर किस तापमान में काम कर सकता है?
यह लॉन्चर -20 डिग्री सेल्सियस की कड़ाके की ठंड से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी तक में शानदार काम कर सकता है।
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Vikas Patel

विकास पटेल 'National Samachar' के संस्थापक (Founder) और मुख्य संपादक (Editor-in-Chief) हैं। डिजिटल जर्नलिज्म में 7 वर्षों से अधिक के गहरे अनुभव के साथ, वे मुख्य रूप से एजुकेशन (Education), सरकारी नौकरी (Govt Jobs), और सरकारी योजनाओं की सटीक रिपोर्टिंग के विशेषज्ञ हैं। विकास का मुख्य उद्देश्य छात्रों और आम नागरिकों तक बिना किसी भ्रम के 100% प्रामाणिक (Authentic), निष्पक्ष और सबसे तेज़ जानकारी पहुँचाना है।

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