Sakat Chauth 2026: आज यूपी में कब दिखेगा चाँद? यहाँ देखें अपने शहर का Time और व्रत कथा

Sakat Chauth 2026 Moonrise Time Today: आज देशभर में, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में सकट चौथ (Sakat Chauth) का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इसे तिलकुटा चौथ और संकष्टी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सलामती के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलती हैं।

व्रती महिलाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि “आज चाँद कब निकलेगा?” (Moonrise Time Today)। यहाँ जानिये यूपी के प्रमुख शहरों में चाँद दिखने का सही समय और पूजा की विधि।

🌙 शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय (Highlights)

  • तिथी: माघ कृष्ण पक्ष चतुर्थी
  • पूजा का समय: शाम को सूर्यास्त के बाद
  • चाँद निकलने का संभावित समय: रात 08:30 बजे के बाद

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Sakat Chauth 2026: आपके शहर में चाँद कब निकलेगा?

मौसम विभाग और पंचांग के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में चाँद दिखने का समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। नीचे दी गई टेबल में अपना शहर देखें:

शहर (City) चाँद निकलने का समय (Time)
लखनऊ (Lucknow) 08:42 PM
वाराणसी (Varanasi) 08:38 PM
प्रयागराज (Prayagraj) 08:40 PM
कानपुर (Kanpur) 08:44 PM
नोएडा & गाजियाबाद 08:52 PM
गोरखपुर (Gorakhpur) 08:35 PM

(नोट: कोहरे के कारण चाँद दिखने में 10-15 मिनट की देरी हो सकती है।)

सकट चौथ व्रत कथा (Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi)

पूजा करते समय इस कथा को पढ़ना या सुनना अनिवार्य माना जाता है। यहाँ संक्षेप में पूरी कहानी दी गई है:

कुम्हार और बुढ़िया माई की कहानी:

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन पकाने के लिए आवा (भट्ठी) लगाया, लेकिन बर्तन पक ही नहीं रहे थे। परेशान होकर वह राजा के पास गया। राजपुरोहित ने कहा कि हर बार आवा लगाते समय एक बच्चे की बलि देनी होगी।

राजा के आदेश पर रोज एक बच्चे की बलि दी जाने लगी। एक दिन एक बुढ़िया के बेटे की बारी आई। बुढ़िया ने अपने बेटे को ‘सकट की सुपारी’ और दूब देकर कहा कि भगवान गणेश तुम्हारी रक्षा करेंगे। बुढ़िया ने बेटे को जाने दिया और खुद सारी रात सकट माता की पूजा करती रही।

अगले दिन जब कुम्हार ने आवा देखा तो वह हैरान रह गया। न सिर्फ बर्तन पक गए थे, बल्कि बुढ़िया का बेटा भी जीवित और सुरक्षित बैठा था। इतना ही नहीं, पहले जिन बच्चों की बलि दी गई थी, वे भी जीवित हो उठे।

तब से माताओं को विश्वास हो गया कि सकट माता (गणेश जी) उनके बच्चों की हर संकट से रक्षा करेंगे। इसी कारण इसे ‘सकट चौथ’ कहा जाता है।

बोलो सकट माता की जय! 🙏

पूजा विधि (Puja Vidhi)

  1. शाम को लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  2. उन्हें तिल के लड्डू, शकरकंद (Sakar-kand) और दूर्वा अर्पित करें।
  3. हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत कथा सुनें।
  4. अंत में चाँद निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

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इस Sakat Chauth 2026 पर सभी माताओं को हमारी तरफ से शुभकामनाएं।

Vikas Patel

Vicky, 'National Samachar' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। उन्हें शिक्षा, सरकारी योजनाओं और राजनीति से जुड़ी खबरों का 7 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और सबसे तेज जानकारी पहुँचाना है।

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