हरियाणा में हुए जाट आरक्षण आंदोलन पर आधारित है डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘’चीर हरण’’

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राजू बोहरा नई दिल्ली / वरिष्ठ फिल्म पत्रकार

फरवरी 2016 में हरियाणा एक बड़े संकट से घिर गया था जब अचानक एक शांतिपूर्ण आरक्षण आंदोलन अप्रत्याशित हिंसा की ओर बढ़ गया। आरक्षण विरोध से यह जातिवादी के बदसूरत दंगों में बदल गया। इस अन्दोलन के कारण कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई और पथराव और आगजनी से करोड़ों की संपत्ति बरबाद हो गई। इस दौरन सब से परेशान करने वाला तथ्य यह था कि इसमें एकतीस मासूम लोगों की जानें गई और सैकड़ों की संख्या मै युवाओं को जेल भेजा गया।

दंगों के दौरान महिलाओं के सामूहिक बलात्कार किए जाने की ख़बरें मीडिया द्वारा तेजी से फैल रही थीं। स्थिति को बदतर बनाने के लिए सभी प्रकार की अकथनीय अफवाहों को प्रसारित किया जा रहा था। क्या यह खबरें सच थीं या फर्जी? इसी दर्दनाक घटना पर पैनोरामा स्पॉटलाइट और ट्विस्टर इंटरटेनमेंट लेकर आ रहे है एक डॉक्यूमेंट्री चीर हरण, जो 2016 में हरियाणा में हुए जाट रिजर्वेशन आंदोलन पर आधारित है। इस डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन कुलदीप रूहील द्वारा किया गया है।

निर्माताओं के अनुसार फिल्म चीर हरण, विरोध और उसके पीछे छीपे कई ऐसे कारणों की खोज करने का एक विनम्र प्रयास है जिसने हिंसा को भड़काया था। यह फिल्म समाज को इस तरह के संघर्षों के बारे में सचेत करता है और इनके कारण हुए परिणामों को दर्शाता है।

निर्देशक कुलदीप रुहिल ने कहा चीर हरण किसी भी हिंसक मानव संघर्ष की योजना को समझने और उसका विश्लेषण करने का एक प्रयास है। ताकि इस  तरह के दंगों से होने वाले भयानक विनाश से भावी पीडी आगाह हो सके।

फिल्म का पहला पोस्टर टीम द्वारा सोशल मीडिया पर हाल में जारी किया गया।जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार फिल्म 29 जनवरी को उत्तर भारत के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

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