मैं गायकी में अपनी एक अलग व सफल पहचान बनाना चाहता हूँ – रवीन्द्र सिंह महर

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राजू बोहरा नयी दिल्ली / वरिष्ठ फिल्म पत्रकार  

चंपावत: उत्तराखंड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद यहां के युवा अपनी सृजन छमता का लोहा मनवाने में पीछे नहीं हटते। एक ऐसे ही युवा हैं रविंद्र सिंह महर जो गीत-संगीत के क्षेत्र में बतौर गायक तेजी से अपनी पहचान बना रहे हैं। इस होनहार उभरते गायक के कुमाऊनी भाषा मैं अब तक करीब 6 गाने अलग-अलग कंपनियों के एल्बम से रिलीज हो चुके हैं जिसमें अलग-अलग तरह के गाने के साथ कुछ भजन भी शामिल है।

मूल रूप से चंपावत जिले के एक छोटे से गांव ‘’डांडा मटकाडा’’ के एक किसान परिवार मैं जन्मे रवीन्द्र रविंद्र महर गायकी के क्षेत्र में बहुत आगे जाना चाहते हैं और सिंगिंग के माध्यम से अपना और अपने उत्तराखंड राज्य का नाम रोशन करना चाहते हैं। फिलहाल ये युवा नौकरी करने के साथ-साथ अपने गायन के सफर को आगे बढ़ाने के लिए भी काफी मेहनत कर रहा है। आइए जानते हैं इसके अब तक के सिंगिंग सफर के बारे में और आगे की योजनाओं के बारे में।

गायन में शुरुआत कब और किस तरह हुई, अब तक कौन-कौन से और कितने गाने आ चुके हैं और किस-किस भाषा में मेरा मतलब कुमाऊनी के अलावा किसी और भाषा में भी आए हैं क्या ?

गीत-संगीत और गाने का शौक तो मुझे बचपन से ही रहा है। बतौर गायक मेरी पहली एलबम ‘चंपावत तामली बाजार’ थी जो न्याल सीरीज् से करीब दो साल पहले आई थी जो कुमाऊनी भाषा में थी जिसकी रिकॉर्डिंग दिल्ली में लक्ष्मी नगर के नीलम स्टूडियो में हुई थी। पहली ही एलबम का मुझे काफी अच्छा रिस्पांस मिला। जिसके लिए में एलबम जुड़े सभी लोगो का धन्वाद करता हूँ। विशेष तौर से में उत्तराखंड के लोक गायक गणेश रावत, प्रकाश कालाजी और पूरन सिंह नयाल जी आभार व्यक्त करता हूँ उन्होंने मुझे बहुत सपोर्ट किया। फ़िलहाल तो मेरे सभी सॉंग उत्तराखंड की भाषा में ही आये है।   

अब तक आपने जितने भी सॉंग या भजन गाये है उनका रिस्पांस कैसा रहा लोगो में ?

नया होने के बावजूद लोगो का काफी अच्छा रिस्पांस मिला और आगे भी उम्मीद करता हूं की उत्तराखंडी संगीत प्रेमियों का प्यार और आशीर्वाद यूं ही मिलता रहेगा मैं धन्यवाद करता हूं अपने उत्तराखंड संगीत प्रेमियों का जिन्होंने मुझे अपना प्यार और आशीर्वाद दिया।

अब तक संगीत प्रेमियों के बीच कौन-कौन से एलबम आ चुके है उनके नाम बताये ?

मेरी पहली अलबम ‘चंपावत तामली बाजार’मेरी दूसरी एल्बम ‘’तल्ला देश की विमला’’ और तीसरी एल्बम थी ‘’मेरी रानीखेत की दीपा’’ जिस में मेरा साथ दिया था उत्तराखंड की युवा गायिका दीपा आर्य ने और चौथी एल्बम थी ‘’ओ रंगीली धना’’ जिसमें मेरा साथ दिया था उत्तराखंड की युवा गायिका माया तिवारी ने। नयाल सीरीज यूट्यूब चैनल से मेरे 4 सॉन्ग रिलीज हुए हैं और अभी हाल ही में मैंने अपना भी एक नया यूट्यूब चैनल लॉन्च किया है जिससे मेरे हाल ही में दो नये सॉन्ग ‘’दीदी भूली नाचे’’ और दूसरा सॉन्ग ‘’जय हो मां पूर्णागिरि मैया’’ रिलीज़ हुये हैं। इसके अलावा इसी सप्ताह मेरा एक और सॉन्ग ‘’डांडा मटकाडा’’ भी रिलीज़ हुआ है जिसका टाइटल मैंने अपने गांव के नाम पर रखा है।

तुम्हारे पसंदीदा गायक-गायिकाओ में उत्तराखंड के कौन-कौन से सिंगर है ?   

उत्तराखंड के स्वर सम्राट लोक गायक-गायिकाओ में स्वर्गीय पप्पू कार्की जी, नरेंद्र सिंह नेगी जी, गजेंद्र राणा जी, मीना राणा और आशा नेगी जी, माया उपाध्याय जी फौजी ललित मोहन जोशी जी इनके गाने में पहले से ही बहुत सुनता था और आज भी सुनता हूं बहुत अच्छा लगता है और इनको ही मैं अपना आइडल भी मानता हूं।

आपने अपना नया सॉंग ‘’डांडा मटकाडा’’ का नाम अपने गांव के नाम से जोड़कर रखा है इसकी कोई खास वजह ?

जी हां मेरा नया रिलीज़ सॉंग डांडा मटकाडा का नाम मेरे गांव से जुडा है इसकी एक खास वजह थी । वह खास वजह यह थी की बुजुर्गों और सज्जनों का कहना था कि जिस गांव में तुमने जन्म लिया है बेटा उस गांव के बारे में भी एक सॉन्ग बनाना और उसमे अपने तलादेश के देवी देवताओं का नाम शामिल करना। मैंने अपने गांव का नाम जोड़कर उन लोगों के लिए एक संदेश भी है जो मेरे से पूछते हैं कि क्या आपके तल्ला देश में पारंपरिक मेले होते हैं। इस गीत के माध्यम से मैंने उन लोगों को एक संदेश जी दिया है की तल्ला देश में भी बहुत सारे पारंपरिक मेले होते हैं। इसमें मैंने अपने तल्ला देश के जितने भी प्रसिद्ध मेले लगते हैं उनके सब जगह का नाम लेकर मैंने एक बहुत ही बढ़िया गीत बनाया है आशा करता हूं आप लोगों को बहुत पसंद आएगा तथा प्यार और आशीर्वाद मिलेगा।

इसके अलावा आप नौकरी भी करते है तो किस तरह सिंगिंग के लिए समय निकलते है ?

जी हा इसके अलावा मैं स्टेज प्रोग्राम भी करता हूं मैंने बहुत सारे स्टेज प्रोग्राम किए हैं दिल्ली, हरियाणा राजस्थान, पंजाब और अपने उत्तराखंड में भी स्टेज प्रोग्राम करता हूं और साथ ही नौकरी भी करता हूँ। कभी-कभी तो बहुत मुश्किल हो जाता है जॉब के साथ इन सब चीजो के लिए समय निकलना पर में जानता हूँ की बिना मेहनत के सफलता नहीं मिलती इस लिए मेहनत करना जरुरी है।

आगे आपका लक्ष्य और आगामी योजना क्या क्या है ?

मैं गायकी में अपनी एक सफल पहचान बनाना चाहता हूँ और अपनी गायकी के माध्यम से अपना, अपने घरवालो का, अपने गांव का, अपने जिले का, अपने राज्य का, और अपने देश का नाम रोशन करना चाहता हूं। मैं खुद को भाग्यशाली समझता हूं कि मेरा जन्म देवभूमि उत्तराखंड जैसे राज्य में हुआ जहा की संस्कृति और सभ्यता बहुत ही खास है।

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